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Friday, September 2, 2016

जल ही अमृत है

।।जय माता दी।।

वेदों में बार बार जल की अमृत बताया गया, जल को जीवनदायिनी कहा गया है और जल का गुणगान और महिमामंडन किया गया है।

आईये जानने की कोशिस करते है की जल को अमृत क्यों बताया गया है।

जल पिने के साथ ही वो आमाशय में जाता है वंहा जो भी कुछ रहता है उसकी सफाई कर अपने साथ आगे छोटी आंत में ले जाता है और छोटी आंत को साफ़ करते करते जो कचरा है, जो बेकार है वो बड़ी आंत में जा कर मल के साथ बहार निकल जाता है,

और बड़ी आंत में जाने से पहले जो रस होता है वो छोटी आंत से खून में मिल जाता है और खून में मिल कर सबसे पहले यकृत (लिवर) में जाता है और वंहा से गुर्दा (किडनी) में जाता है और किडनी से जो कचरा है, जो भी बचता है वो मूत्र मार्ग से शरीर से बहार निकल जाता है।

शरीर से बहार निकलने से पहले कितने काम करता है जल आईये देखते है,

खून में मिलने के साथ ही खून को पतला करता है खून में मिलकर यकृत (लिवर) में जाता है और वंहा पे जो अच्छा होता है वो वंहा पे छोड़ देता है और कचरा अपने साथ ले लेता है वंहा से आगे चल कर वो किडनी में जाता है वंहा पे जो अच्छा रहता है वो वंहा छोड़ देता है और कचरा अपने साथ ले लेता है और शरीर से बहार निकाल देता है।

खून, यकृत और किडनी सिर्फ जल को पिते रेहने से साफ़ होते रहते है और तरल रहते है और सिर्फ खून और ये दोनों अंग साफ़ रेहने से ही शरीर में सेकड़ो बीमारियो को दूर कर देता है और जीवन दायीं शक्तियो को बड़ा देता है।

इसलिए वेदों में जल को अमृत कहा गया है जीवनदायी कहा गया है।

जल पिए और स्वस्थ रहे।

।।जय माता दी।।